बुरे वक्त का लम्हा हूँ,
अंधा,गूंगा बहरा हूँ.
अहसासों के काग़ज़ पर,
ख़ुद को लिखता रहता हूँ.
गिरने को हूँ यूँ समझो,
एक पुराना कमरा हूँ.
इंतज़ार का हूँ दीपक ,
दरवाज़े पर जलता हूँ.
सिर्फ शिकारी आते हैं,
जंगल का इक रस्ता हूँ.
पार करो घबराओ मत,
मैं एक सूखा दरिया हूँ.
उम्र बिता कर जान लिया,
तन्हा था और तन्हा हूँ.
Courtesy ~ Sufi Sure 🙏