मणिकर्णिका ताम्बे , भारत की महान वीरांगना
लक्ष्मीबाई , झाँसी की रानी को
कोटि कोटि नमन
( 19 . 11 . 1928 -- 18 . 6 .58 )
कानपुर के नाना की मुह बोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वो संतान अकेली थी,
नाना के सॅंग पढ़ती थी वो नाना के सॅंग खेली थी
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी.
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी .....
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता का कुछ अंश .