हरि बोल ॐ नमः शिवाय हरि ॐ नमः शिवाय
राम राम सा, जय श्री कृष्ण!!
*तंदुरस्त है तो त्योहार है* अतः सावधानी व सतर्कता इन दिनों में अत्यंत जरूरी है।
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पानी को कितना भी गर्म कर लें
पर वह थोड़ी देर बाद अपने मूल स्वभाव में आकर शीतल हो जाता हैं।
इसी प्रकार हम कितने भी क्रोध में, भय में, अशांति में रह लें,
थोड़ी देर बाद बोध में, निर्भयता में और प्रसन्नता में हमें आना ही होगा
क्योंकि यही हमारा मूल स्वभाव है ।
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🌹 *जरूरतों के हिसाब से लोगों से* *जुड़े रहना एक सामान्य व्यवहार* *में आता है*,
*लेकिन जरूरत के बगैर भी* *लोगों का ख्याल रखना*
*असाधारण व्यक्तित्व की पहचान* *होती है* !!!
।।जय सियाराम जी।।
🙏आपका दिन शुभ और मँगलमय हो*.🙏