गजल
आप अपनी खूबियां पहचान कर भी देखिए
गम की छलनी से सूखों को छान कर भी देखिए।
आज अपनी छोङकर ज़िद एक पल को ही सही
कह रहे घर के बङे वो मानकर भी देखिए।
फूल, तितली, बाग, डाली ,पेड़ कहते शान से
मुश्किलों में हर खुशी का गान कर भी देखिए।
धन तिजोरी में भरा है पर खुशी मिलती नहीं
चंद सिक्के आज अपने दान कर भी देखिए।
मजहबों के कारनामों पर उलझना छोङकर
आदमी को आदमी सा मान कर भी देखिए।
है अगर अमृत की चाहत तो जरा जोखिम उठा
नीलकंठी की तरह विषपान कर भी देखिए।
आंख अर्जुन के सरीखी रख जरा तूं लक्ष्य पर
तीर तरकश में है 'पूनम' तान कर भी देखिए।
डॉ पूनम गुजरानी