# विषय .एहसान फरोस्त "
# विधा .कविता ***
जीवन में एहसान फरोस्त ,नही होना चाहिए ।
जीवन में एहसान को ,कबूल करना चाहिए ।।
एहसान का बदला ,उपकार करके देना चाहिए ।
उपकार करके प्रभु ,को रिजाने जरुर चाहिए ।।
मानवता से जीवन को ,सुशोभित करना चाहिए ।
मानव सेवा ही ,प्रभु सेवा समझना ही चाहिए ।।
प्रभु सेवा ही ,मानव सेवा दिल से समझना चाहिए ।
परोपकार को ,जीवन में उतारना जरुर चाहिए ।।
मानव हो तो मानव ,की तरह बनना चाहिए ।
वरना अपना जीवन ,व्यर्थ समझना चाहिए ।।
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