एक मुनिवर ने अपने शिष्यो को समजाते हुए कहा,
"ज्ञात रखे जीवन सरल रहे यही जरूरी है खुद को भीतर ही बड़ा बनाकर घूमने से अपनी सिद्धि प्राप्त कर ली वह मानना उचित नही है, लोगो के भीतर सुगम बनकर जिए न कि ज्यादा होशियार चालाक व भिन्न फिर भले ही आप में वह सारे गुन हो"
शिष्य ये बात सुनकर आश्चर्यचकित हुए की गुरुजी ने यह क्या कह डाला? सबसे सीधे बनकर रहे उसका मतलब तो यह है कि आपको सरलता से कोई काट देगा,
उतर में गुरुजीने बताया,
आप पेड़ की तरह सीधे जरूर रहे लेकिन कठिन बनकर ताकि आपका कटा हुआ भाग भी अच्छी चीज में खुद को ढाल ले।