समुंदर सा खारा हूं
खुद के आंसू पी चुका, नदी का एक सूखा किनारा हूं
खुद प्यार को तरस रहा, टूटे दिलों का एक सहारा हूं
लोगों की ख्वाहिशें पूरी करने, टूटता वो एक सितारा हू
रुका लो मुझे मना लो मुझे, मै ना रुकनेवाला बंजारा हूं
मुहब्बत की आग में तपा हुआ एक सुस्त सा अंगारा हूं
इश्क़ हूं इश्क़ साहब, बस सदियों से हुस्न के आगे हारा हूं
नमक हलाली खून में है, बस तभी समुंदर सा खारा हूं