कहते है गुरु बिन ज्ञान कहाँ ,
पहले जैसे गुरु अब है कहाँ l
चले थे हम गुरु बनाने ,
जा फिर खुद की इज्जत को गवाने l
गुरु है तो एक इंसान ,
क्या पता कब जाग जाए ,
उसके अंदर का शैतान l
गुरु के नाम पर कर जाए बेईमानी ,
इस से अच्छा है ,खुद की इज्जत बचानी l
चले हो जो गुरु बनाने ,
तो जान लिए जे पहले ,
उस गुरु के अफ़साने l
घर की इज्जत अपने हाथ ,
अजनबी पर मत करना विश्वास l
navita 🎼