पहली नज़र
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आज एक ख़्वाब से टकरा के आ गये
पहली नज़र में दिल गँवा के आ गये
ख़ंजर से तेज़ थी एक हसीं की निगाहें
नज़र उठी, चोट दिल पे खा के आ गये
कुछ अलग बात थी उस नाज़नीन की
के पल में हम खुद को लुटा के आ गये
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-सन्तोष दौनेरिया
(गँवा - खो देना, ख़ंजर - कटार, तेज़ - पैनी, नाज़नीन - सुंदरी, खुद - स्वंम)