जिंदगी पाना चाहती है आज तुम्हे ऐसे ..
जैसे सागर की लेहरे पाना चाहती हो किनारे को ..
जैसे सुखी रेत तरसती है बारिश के बूँद को ..
जैसे चकोर तरसता है चाँद की चाँदनी को ..
जैसे परवाना पिघलता है शमा में ..
कुछ इस तरह दिल हुआ है आज तेरी जुदाई में ..
अब बस अपना वजूद खोना चाहते है हम ...
सिर्फ तुम्हे ही पाने को ।
Dr.Divya