सुदंर रचना आपके दिल को गद गद कर देगी ..
नित जीवन के संधर्षो से ,जब टूट चुका हो अन्तर्मन ।तब सुख के मिले समंदर का रह जाता कोई अर्थ नही ।
जब फसल सूख कर जल के बिन ,तिनका तिनका बन गिर जाये ।फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नही
संबंध कोई भी हो लेकीन ,यदि दुःख मे साथ न दे अपना ।फिर सुख मे उन संबंधो का रह जाता कोई अर्थ नही ।
छोटी छोटी खुशियों के क्षण ,निकल जाते हो रोज जहां ।फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नही ।
मन कटु वाणी से आहत हो ,भीतर तक छलनी हो जाये ।फिर बाद कहे प्रिय वचनो का रह जाता कोई अर्थ नही ।
सुख साधन चाहे जितने हो ,पर काया रोगो का धर हो ।फिर उन अगणित सुविधाओं का रह जाता ,कोई अर्थ नही ।
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