ये माना रात काली है आजकल,
मेरा चांद मुझमें खोया है।
कैसे नज़र आए वो मुझे,
जो मेरी आंखो में भर आया है।
बड़े दिन बाद ख़बर हुई है आने की,
उसका पत्र और संदेशा आया है।
कहते है इंतेज़ार जरूरी होता है प्यार में,
देखो मुझे, इंतेज़ार का रंग निखर आया है।
मेरी आदत जरूर होगी चुप रहने की,
मगर सबकुछ तुझे आंखो से बताया है।
छुपाने लगीं हूं अब ख़त तेरे,
स्याही का रंग आंखो में समाया है।
तूने कहा था ख़त लिखूंगा तुझे मैं,
क्या मेरा पता नहीं पाया है।
लिखती हूं ख़त तमाम मैं तुझको,
नाव में तेरे पास पहुंचाया हैं।
सच कहता है जमाना किसी काम की नहीं मै,
देख तो ले कभी किस हद तक आजमाया है।
वहीं शामे गुजरती हैं रात चांदनी भी,
मेरे दिल के अंधेरे का दिया ना पाया है।
मुझे रोशनी दे ख़ुदा मेरे,
तेरे इस जमाने में मै ने सब गवाया है।