बाहों में उसको कसने लगी
जैसे दुनिया उसकी पलटने लगी
अंत में वो हुआ दोनों चल दिए
जिस गली से आए उधर चल दिए।
ये पता था आखिरी ये साथ है
जो बदला उसका एहसास हैं
फिर से दौड़ी बाहों में भरने को
जो बदला था उसे बदलने को
किसे पता था मिलन आखिरी हो जाएगा
उन दोनों का कल बदल जाएगा,
ढूंढते रहेंगे जमाने में फिर
उनका जमाना ही बदल जाएगा।
रात काली हुई बारिश भी हुई,
सावन मास भी आकर खाली गया।
बदला था तो ये उनकी यादें ही,
और यादों का अब शहर हो गया।
उनके ख़ुद के किस्से किताबो में छपे,
और सूरत पर उनकी बुढ़ापा आ गया।