#तू मेरे साथ चल...
मेरी मंज़िल तक ना सही;
मेरे इस सफ़र में मेरे साथ चल...
मेरी कबर तक ना सही;
मेरी ज़िंदगी में मेरे साथ चल...
अगर सुबह तक ना सही;
शाम ढलने तक मेरे साथ चल...
माना कि कल तक ना सही;
मगर आज तो मेरे साथ चल...
हकीकत में तो ना सही अब;
मेरे खयालों में तो मेरे साथ चल...