सूरत-ए-हाल
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शब भर रू-ब-रू रही आपकी तस्वीर-ए-तसव्वुर
रात क़तरा-क़तरा बीती हसरत-ए- दीद के सहारे
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- सन्तोष दौनेरिया
रू-ब-रू - आमने-सामने, तसव्वुर - कल्पना, शब - रात, क़तरा- क़तरा- बूंद-बूंद, हसरत - दिली ख़्वाहिश, दीद - दर्शन )