इंसाफ जरूर होगा इस बार देखना ,
वो रावण जिसको हर बार जलाकर आंनद लेते है,
जहा सीता मैया की पवित्रता पर आंच ना आने देते थे,
वो आज पहेली मरतबा जले बिना दुनिया के सामने हँसता नजर आएगा,
और दुनिया का एक बरश पूरी रामायण की लिखावट को चीर कर चला जाएगा,
वो बुरा नहीं उसकी नियत बुरी थी,
राम तो भगवान थे फिर भी शंका की,
लाजवाब पल वो भी देख कर चौंक जाएंगे,
जहा अग्नि दहन कि परीक्षा सीता ने भी दी थी,
चारो और नजरिया बदल जाएगा सारी कायनात का,
जब एक अहंकार मान चल रहे खुदको रावण से ज्यादा,
वो जहर उगले रहेंगे एक एक औरत को नौच कर।
दफन तो अभी करना है दरिंदगी की हैवानियत को,
जहा हर कदम चरित्रहीन जो कर रहा है छोटी छोटी मासूम लड़कियों को भी।
रावण जैसे इंसानियत होती गर घर घर में रक्षा के लिए तो सरकार की जरूरत ना होती,
मासूम जान जूझती रहेती है इन हालातों से और पैसों में अंधी है सरकार,
सरकार भी स्वार्थी है जो पैसों में ग़ुमराह झेल रही है हैवानियत को।
DEAR ZINDAGI 🙏