रिश्ते
मेरी जिंदगी के रिश्ते क्यों है ऐसे
जब लगता है मुझको अब सब ठीक है
तब बिखर जाते है रिश्ते
फिर जब समेटो तो और दूर चले जाते है रिश्ते।
क्यों है ऐसे ये रिश्ते
जहाँ कोई उनके साथ के लिये तड़पता है,
तो वह कोई उस साथ को तोड़ देता हैं।
जहां कोई उस रिश्तों को पाकर भी नही समझता।
तो वही कोई उसे खोकर समझता है।
कुछ इसी तरह है मेरी जिंदगी।
जिसमें कुछ रिश्तों का मोल न समझा सकी,
और कुछ रिश्तों का मोल जानना कर भी न समझी।
ज्योति कुमारी