कोरोना
ना जाने कहां से आया एक कोरोना
बहा ले गया पूरी दुनिया,
कुछ को मिला किनारा,
कुछ को मिली मौत,
कुछ फसे महामारी के बीच।
है इन्तेजार उस सुबह का,
जब होगा सब समान,
जब न छुटेगा किसी का साथ,
न होगे महामारी के बीच।
जब होगी पूरी दुनिया एक तरफ़,
तब होगा कोरोना मिलो दूर।
खबर न होगी किसी को,
होगा वो ऐसा बुरा स्वपन,
खो जायेगा वो अंधेरे में,
जब होगा एक नया सबेरा।
(ज्योति कुमारी)