डर डर वो जीती अब तो खुद की भी परछाई से
इतने बुरे की भी, उसे उम्मीद ना थी अच्छाई से
अवगत करा दो हर बेटी को इस कड़वी सच्चाई से
लड़ना है अब राक्षसों की इसी#मानसिक लड़ाई से
दे ताना तो डांट के रख दो बदन छुए तो काट के रख दो
ना रुकना है ना झुकना उस हस्ती की कोई ऊंचाई से
भोगा तूने तुझे ही लड़ना, डरना फिर क्यों रुसवाई से
लड़कर ही मिलती है इज्जत, इज्जत की भरपाई से
#मानसिक