(1) नारायण कृत – विमान चन्द्रिका
( 2) शौनक कृत न् व्योमयान तंत्र
(3) गर्ग – यन्त्रकल्प
(4) वायस्पतिकृत – यान बिन्दु +
(5) चाक्रायणीकृत खेटयान प्रदीपिका
(6) धुण्डीनाथ – व्योमयानार्क प्रकाश
महर्षि भारद्वाज यंत्र सर्वस्व नामक ग्रंथ लिखा था, उसका एक भाग वैमानिक शास्त्र है
रहस्यज्ञ अधिकारी ( पायलट ) –
। शास्त्रों में विमान चलाने के बत्तीस रहस्य बताए गए हैं । उनका भलीभाँति ज्ञान रखने वाला ही सफल चालक हो सकता है । क्योंकि विमान बनाना, उसे जमीन से आकाश में ले जाना, खड़ा करना, आगे बढ़ाना टेढ़ी – मेढ़ी गति से चलाना या चक्कर लगाना और विमान के वेग को कम अथवा अधिक करना उसे जाने बिना यान चलाना असम्भव है
- कृतक रहस्य - Hardware of vimana.
- गूढ़ रहस्य – विमान को छिपाने की विधि.
- अपरोक्ष रहस्य – रोहिणी विद्युत् के फैलाने से विमान के सामने आने वाली वस्तुओं को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है.
- संकोचा – विमान को छोटा करना.
- विस्तृता – विमान को बड़ा करना । यहाँयह ज्ञातव्य है कि वर्तमान काल में यह तकनीक १९७०के बाद विकसित हुई है .
- सर्पागमन रहस्य – विमान को सर्प के समान टेढ़ी – मेढ़ी गति से उड़ाना.
- परशब्द ग्राहक रहस्य – दूसरे विमान पर लोगों की बात-चीत सुनी जा सकती है .
- रूपाकर्षण रहस्य – दूसरे विमानों के अंदर का सबकुछ देखा जा सकता था.
- दिक्प्रदर्शन रह्रस्य – दिशा सम्पत्ति नामक यंत्र द्वारा दूसरे विमान की दिशा ध्यान में आती है .
- स्तब्धक रहस्य – एक विशेष प्रकार का अपस्मार नामक गैस स्तम्भन यंत्र द्वारा दूसरे विमान पर छोड़ने से अंदर के सब लोग बेहोश हो जाते हैं.
- कर्षण रहस्य – इसके अनुसार अपने विमान का नाश करने आने वाले शत्रु के विमान पर अपने विमान के मुख में रहने वाली वैश्र्वानर नाम की नली में ज्वालिनी को जलाकर सत्तासी लिंक ( डिग्री जैसा कोई नाप है ) प्रमाण हो, तब तक गर्म कर फिर दोनों चक्कल की कीलि ( बटन ) चलाकर शत्रु विमानों पर गोलाकार से उस शक्ति की फैलाने से शत्रु का विमान नष्ट हो जाता है.
आकाश मार्ग तथा उनके आवर्तों का वर्णन निम्नानुसार है –
10 km ( 1 ) रेखा पथ – शक्त्यावृत्त – whirlpool of energy
50 km ( 2 ) – वातावृत्त – wind
60 km ( 3 ) कक्ष पथ – किरणावृत्त – solar rays
80 km ( 4 ) शक्तिपथ – सत्यावृत्त – cold current.
विमान के यन्त्र – विमान शास्त्र में 31 प्रकार के यंत्र तथा उनका विमान में निश्चित स्थान का वर्णन मिलता है .
ऊर्जा स्रोत – विमान को चलाने के लिए चार प्रकार के ऊर्जा स्रोतों का महर्षि भरद्वाज उल्लेख करते हैं .
विमान के प्रकार : सतयुग और त्रेता युग में सम्भव था । इनके ५६ प्रकार बताए गए हैं तथा कलियुग में कृतिका प्रकार के यंत्र चालित विमान थे इनके २५ प्रकार बताए हैं. इनमें शकुन,रुक्म, हंस, पुष्कर, त्रिपुर आदि प्रमुख थे.
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