ये जिन्दगी अब तेरे साथ-साथ चलती है ,
यादो में ही अब ये दिन-रात बसर करती है ।।
ये निगाहे अब बस तुझे ही दूंढ्ती रहती है ,
तुझे मसरूफ देख सिसक-सिसक के रोती है ।।
ये तनहाई अब दिल में काटो सी चुभती है ,
जैसे दिल में एक नये जख्म को पैदा करती है ।।
कसूर सायद मेरी किस्मत की ही रहती है ,
जो मेरी साँसे मुझसे ऐसे दूर होती रहती है ।।
मुझें गिला नही वो ऐसा क्यो करती है ,
पर मेरे दिल में एक दर्द सी मेहसूस होती है ।।
ये जिन्दगी अब तेरे साथ-साथ चलती है ,
यादो में ही अब ये दिन-रात बसर करती है ।।