“अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च:”
अर्थात्
अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है।
किन्तु आज कल के हालात देख प्रतीत होता है की पहली पंक्ति से ' अ ' निकाल कर दूसरी पंक्ति में जोड़ दिया है।
तोह कुछ ऐसे होगा की,
"हिंसा परमो धर्मः अधर्म हिंसा तथैव च:"
अर्थात्
हिंसा मनुष्य का परम धर्म है और अधर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है।
#अहिंसा