अहिंसा धर्म है ।
हाँ परम धर्म है ।
परन्तु धर्म पर आघात
धर्म पर आक्षेप
धर्म की निंदा
हिंसात्मक होने का
आवाहन है ।
धर्म मानव की जीवन्तता का चिह्न है ।
शव का कैसा धर्म ।
यदि साँस रुकी नहीं है ।
तो अंहिसा की सीमा रेखा पहचाननी होगी ।
सड़ी गली परिभाषाओं का मोह
त्यागना होगा ।
#अहिंसा