बेघर हूं मुझे एक अदद घर चाहिए
मुझको आसरा मिले , ऐसा दर चाहिए
पसार लूंगा पांव अपने , देखकर चादर
चाहत नहीं कि मुझको दीवार - ओ - दर चाहिए
अदाकर सकूं कीमत , जो देखें हैं ख्वाब मैनें
मुझे नहीं दर - ब - दर की , ठोकर चाहिए
एक छोटी सी दुनिया हो , रिश्तों में हो गरमाहट
सुख - दुख से बाखबर हों , वो नज़र चाहिए
घायल हो जब भी कोई , हर दिल से आह निकले
दर्द पी सके जो अपना , वो ज़िगर चाहिए
मुस्कान हो चेहरे पर , धवल हो हृदय सबका
अमृत सी वाणी निकले , वो अधर चाहिए
इस बेरहम दुनिया में , सपने हैं अपने - अपने
सपने हों सच सभी के , नहीं कोई बेघर चाहिए
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#आवास