लाश पर मँड़रा रहे कुछ गिद्ध ।
आँखो में रिकाडिंग डिवाइस लगाए ।
बोल रहे हैं कुछ अपनी भाषा में ।
संभवतः अपने जैसे परन्तु श्वेतांबरों को ।
बुला रहे हैं चीख -चीख कर ।
मैंने जमीन बना दी ,खाद पानी भी दे दिया ।
आपके अस्तित्व को हमने जवानी दे दिया ।
आइए गिन लीजिए ,कर लीजिए पूरा हिसाब ।
मैं सात्विक ,संस्कारी जीव हूँ जनाब ।
मैं विलुप्त नहीं हुआ ।
मेरी तपस्या सफल हो गयी ।
आपकी कृपा से शरीर बदल गया ।
पर क्या करूँ आत्मा वही रही ।