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# विषय .किन्नर "
किन्नर बिन बुलाए मेहमान ,की तरह आ जाते ।
इनके आशिष कभी भी ,जीवन में निष्फल नही जाते ।।
इनको खुश रखना ,ईश्वर को खुश करने समान होता ।
इनको नाराज नहीं करने ,ये अभिशाप ही दे जाते ।।
ये भी हमारे समाज के ,अभिन्न अंग कहलाते ।
ये हर समय खुशी के ,मौके पर खुश करने आ जाते ।।
ये ताली बजा कर ,नाचते और गाते रहते ।
समाज को अपनी ,सोच बदलनी चाहिए ।।
इनकी उपेक्षा कभी ,भी किसी को नहीं करनी चाहिए ।
किन्नर सबसे पहले गोकुल में ,श्रीकृष्ण के जन्म पर आये ।।
तभी से यह किसी के वहाँ ,बधाई देने आ ही जाते ।।
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