काश मनुष्य का शरीर भी
वो #स्वसंचालित यंत्र जैसा होता
फिर उसे कोई कष्ट ही न होता
जहाँ न कोई गिला शिकवा होता
बस अपना काम करना ही ध्येय होता
किसीको देखके वो यूँ फिर न जलता
मन में कोई मेल न उसके होता
किसीकी खुशी में खुश नही पर दुःखी भी न होता
जिसमें कोई भावनाओं का भवंडर ही न होता
फिर कैसे दिल को कोई ठेस पहुँचा सकता
जाने का कोई उसका गम भी न होता
न आने का उसका कोई वक्त भी होता
काश मनुष्य का शरीर भी
वो #स्वसंचालित यंत्र जैसा होता