# विषय .गुमराह ***
# कविता *********
संसार में लोग ,गुमराह हो जाते ।
अपने को गलत ,राह पर ले जाते ।।
अपने जीवन को ,भटकाते फिरते ।
अपना जीवन ,कलंकित बना देते ।।
लोगों की नजर ,में बदचलन कहलाते ।
लोग उन्हें ,धृणा की दृष्टि से देखते ।।
अपना जीवन ,अपने हाथ से बिगाड़ते ।
फिर उन्हें सुधरने का ,मौका नहीं देते ।।
वो फिर गर्त में ,ही लगातार गिरते ।
अपना जीवन ,नर्क तुल्य बनाते ।।
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