*धर्म का पालन करने वाला मनुष्य वास्त्व में कभी दु:खी नहीं होता और भोगी मनुष्य कभी सुखी नहीं होता* । आजकल हरेक बात सुख भोग को दृष्टि में रखकर कही जाती है - यह दृष्टि राक्षसों की है । *गिद्द बहुत ऊँचा उडता है , उसकी दृष्टि बडी तेज होती है , पर जमीन पर सडा - गला मास देखते ही उसकी उडान बंद हो जाती है और वह वहीं मास पर गिर जाता है* । ऐसे ही लोग शास्त्रों की बातें बहुत जानते हैं , व्याख्यान में बडी - बडी बातें बनाते हैं , पर कनक - कामिनी ( रुपये और स्त्री ) देखते ही वहीं गिर जाते हैं ! " सुप्रभात जी " जय सियाराम जी