यह हुश्न की इबादत है , और कुछ भी नहीं,
मीट्ठी में मिली है मिट्टी, और कुछ भी नहीं।।
आगोश में हाल ए जिस्म , जिंदादिली फकत,
छूटती सांसों से है कट्टी, और कुछ भी नहीं।।
रूखसत है अपने आप से, दिवानगी आलम,
दिवानगी दौर से ही छुट्टी , और कुछ भी नहीं।।
लब ए बयां होता नहीं है, दर्द ए दिल दुनिया,
लफ्ज़ो से भी यारी है टूटी,और कुछ भी नहीं।।
मिलते रहेंगे बीछडने के, अंदाज से बेफिक्र ही,
सफर जिंदगी रुहानी रूठी,और कुछ भी नहीं।।
मिलते रहे, मीटते रहे, अंदाज ए दिल परवाना,
शम्अ की लौ फकत बुझी ,और कुछ भी नहीं।।
रुखसत हो गए हसीन मौके, जो मिले थे कभी,
रूखसत ना हुई जिंदगी, और कुछ भी नहीं।।
है उम्मीद पर टीकी हुई , यह जिंदगी अपनी,
कहानी है सपनों से जुड़ी ,और कुछ भी नहीं।।
वल्लाह वोह नुरानी , झलकियां ही गजब थी,
मीट गई अंदाज़े बेखुदी, और कुछ भी नहीं ।।
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