वीर गिरे धरती माँ पर तो
वीर अमर हो जाता है,
आँसू नहीं बलिदान उसका
अमर गूँज दे देता है।
वह लड़ता है महाभारत जय का
अडिग विश्वास में चल पड़ता है,
नहा लिया गंगा वह रण में
तीर्थ वहीं कर लेता है।
कल नहीं आज शौर्य
विजय पथ बन जाता है,
धर्मयुद्ध में सारथी बन
देश स्वयं आ जाता है।
**महेश रौतेला