सुदंर हास्य व्यंग्य कविता ...
टोपी सफेदझक पहन कर नेताजी वोट मांगने चले हैं ।
सफेद कपडों में अपने दाग छुपाते चले हैं ।।
आजकल इनकी अकड कहाँ गुम हो गयी है ।
सभी के आशीर्वाद ,लेकर पैर छुते चल रहे हैं ।
गरज पडे तो गधे को भी बाप कहना पडता है यह कहावत चरितार्थ कर रहे हैं ।।
भारत के भाग्यविधाता अपना भाग्य आजमाने चले हैं ।
अब उन्हें कोई धास नहीं डालता ,इसकी कोई परवाह नहीं है ।।
अपने अस्तित्व की लडाई लडने चल पडे हैं ।
झुठे वादों की भरमार लिस्ट ले कर बताते हुए चल रहे हैं ।
वोट मिलने पर किसे वादें पुरे करने हैं ।
धर्म के नाम पर रेवडीयाँ बाँटना भुल चूके हैं ।।
अपना स्वार्थ सिद्ध करने चल पडे हैं ।
देखो नेताजी नये भारत का मसीहा बनने चल पडे हैं ।।
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