सुदंर कविता ..
शब्द .मटका ।
गर्मी में प्राणों से भी प्रिय ठंडा पानी लगता हैं ।
हर प्राणी गर्मी में अपनी प्यास बुझाने लालायित रहता हैं ।।
लाख फ्रिज का पानी पियो पर मटके के जल की तुलना नहीं हो सकती हैं ।
मटका हमें खुद ठंडा होकर शीतल जल देता हैं ।।
मटाका सर्दीयों की मिट्टी से बना हो तो बहुत ठंडा रहता हैं ।
मटके की कहानी भी निराली है ,वह कयी कठीन परिस्थितियों का सामना करता हैं ।।
मटाका हमें शिक्षा देता हैं कि हर परिस्थिति में मटके की तरह ठंडा रहना चाहिए ।
जो अपने मन को ठंडा व मधुर होता हैं वही सबको प्यारा लगता हैं ।।
मटका सब सहन करके भी शीतल जल से मन आनंदित कर देता हैं ।
हमें भी अपने अच्छे स्वभाव से सबके दिल़ो को ठंडा कर देना चाहिए ।।
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