सुदंर कविता ..
चलो खत्म हुई मुलाकातें ,अब चलते हैं ।
बहुत सुनाई अपनी कहानी ,अब चलते हैं ।।
गमों में नजरे कमजोर हुई ,शुकुन मन को नहीं मिलता हैं ।
सांसों का परिदां उडने को बेकरार हैं ,अब चलते हैं ।।
बचपन खेलकुद में बीता ,जवानी दौड भाग में चली गयी है ।
बुढापा दरवाजे पर दस्तक मारता है ,अब चलते हैं ।।
न जाने कितने जोडे ,कितने गंवाये ,पर कुछ हाथ नहीं आया हैं ।
सिफर से शुरू की थी जिदंगी ,सिफर पे खत्म हो गयी हैं ।
रुह का सफर है बाकी ,अब आपको अलविदा कह कर चलते हैं ।।
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