कविता ....,विषय ....अर्थ ,धन ,दौलत ,रुपया .....
जीवन जीने के लिए ,अर्थ ही भगवान है ।
अर्थ बिना सूना जीवन ,श्मशान समान है ।।
अर्थ कमाने दुनियाँ ,दिन रात भागती रहती है ।
अर्थ पाना ही सबक ,सुदंर सपना होता ही है।।
अर्थ बिना भिखारी बन ,मानव दर दर भटकता है ।
अर्थ बिना परिवार भी ,हर समय ताने देता है ।।
अर्थ से सभी वस्तुएँ , जीवन में खरीदी जाती है ।
बंगले ,शानोशौकत सब ,अर्थ की बलिहारी है ।।
अर्थ से ही इज्जत ,सम्मान ,पद आदि मिलते है ।
पत्नि भी अर्थ बिना ,आँखो का तारा नही बनाती है ।।
अर्थ से ही सभी रिश्तें ,नातें निभाये जाते है ।
कहता बृजेश अर्थ बिना ,कोई खुशी कही नही मिलती है ।।
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