कभी यूँ भी गुज़रो पास से
साँसों को तेरी खुशबू आये
रूह को करार आये मेरी
ऐसे छू कर गुज़र जाओ
कभी तुम भी पुकारो मुझको
मेरी भी आत्मा तृप्त हो जाए
तेरे पहलू में रह कर हम
अपने सारे गम भूल जाएं
कभी ऐसे भी करीब आओ मेरे
दरमियां न रहे कोई अपने दूरी
तू मुझमें मैं तुझमें समा जाऊँ
ऐसे हम घुल के एक हो जाएं
🖤🖤🖤🖤