बुझते चिराग जल उठते हैं , मुरझाते फूल खिल उठते हैं
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
दिल में तरंगें उठती हैं , मन मोर मचलने लगता है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
ज्येष्ठ भी सावन लगता है , पतझड़ बसंत बन जाता है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
फूलों की टोलियां सहमी हैं , कलियां भी सजने लगती हैं
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
झरनों की तान खो जाती है , बहार आने से सकुचाती है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
हृदय का स्पंदन बढ़ जाता है , आंखों में चमक आ जाती है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
बूढ़ों पे जवानी छा जाती , राह भटकते पथिक सभी
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
कामिनियां रंजिश रखती हैं , चांद बहुत शर्माता है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
होठों पे हंसी छा जाती है , कोई चाह नहीं रह जाती है
जब नाम तुम्हारा लेते हैं
____________
#तुम्हारा