चंदन बन सा मन
--------------------
चंदन-बन सा मन होता है जिसमें एक दर्पण होता है
साँस-साँस में लहरा जाए ,ऐसा एक कानन होता है |
-भोर रूपहरी,रंग सुनहरे प्रकृति ने जीना सिखलाया
और श्वाँस की सरगम छेड़ी ,हर क्षण ही मन को बहलाया
आत्म-परीक्षण करने का जो गुण पहचाने मन होता है ------
-प्रेम-राग और करुणा,शुचिता ,झोली भर दी अनुरागों से
प्रीत-रीत के गीत सुनाए ,मन भर दीन्हा है फ़ागों से
चंदन की सुगंध से भरकर जी पाएं ,जीवन होता है ----
-कहते हैं कुछ सर्प विषैले ,लिपटे रहते हैं चंदन से
भूल सभी बातें अनुरागी ,दंत गडा देते वे मन से
शाश्वत सत्य यदि पहचाने तब ही तो वंदन होता है ---
डॉ.प्रणव भारती