*आहत हुआ दिल*
दिल में एक कोना ऐसा है,
जहाँ किसी के दूर जाने का शोर सा है।
डर है बस उस के खो जाने का,
पर वो इंसान अपनी रूह तो खो चुका है।
आहत हुआ है उसका दिल,
पर घायल मेरा दिल भी हुआ है।
चाहत नहीं है समझ जाने की,
कि शायद कोई अपना दूर हो गया है।
सुनता हूँ जब उसके शोर को,
तो मेरा दिल भी जल उठता है।
देखता हूँ जब उसकी तरफ,
तो खुद का चेहरा ही दिखता है।
जीने की चाहत उसे नहीं या मुझे नहीं,
बस मेरा दिल इस सवाल का,
जवाब खोज रहा है।
जा चुकी है वो इंसान,
या मैं चला गया हूँ उसके साथ,
ये बोझ मेरा दिल कब से ढ़ो रहा है।
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पागल दिवाना