"अरे आरती, तेरे कुछ कपड़े थोड़े दिनों के लिए मुझे दोगी?"
यह सवाल था मेरे एक दोस्त रवि का! मैं भी एसे ही चौंक गई थी, भला एक लडके को लडकी के ड्रैस का क्या काम..
"क्यों टिकटोक बनानी है क्या? " मैंने मज़ाक के सुर में पूछा।
वो मुझे घूरने लगा। मैंने शांत हो कर उसे वजह पूछी।
दरअसल बात यह थी की वो एक लड़की को प्रेम करता था, मगर यह बात लड़की के परिवार को पसंद नहीं थी। वे लोग उसकी शादी जबरदस्ती किसी ओर से करवा रहे थे। अब रवि और उस लड़की एक ही तरीके से मिल सकते थे, वो था भागना। और रवि उस लड़की के घर से कुछ भी सामान लेना नहीं चाहता था, इसीलिए उसने मेरे कपड़े मागे थे, जो कुछ दिन उस लड़की के काम आते।
मैं वो दोनो के लिए खुश थी, पर डर भी था कि अगर किसी ने पकड लिया तो? मगर रवि बिलकुल निडर था, वो मेरे कुछ ड्रेस ले कर निकल पडा। मैं बस इतना कह पाइ कि कुछ काम हो तो बताना।
कुछ दिनों बाद रवि का कोल आया, उसने बताया की अब वो लड़की के पिता शादी के लिए मान गए हैं। उस दिन रवि ने उसे भगाया ही नहीं था, पर उसके पिता से अपने सच्चे प्रेम की दास्तान बताई थी। रवि की निडरता के कारण वे दोनो आज परिवार की सहमति से साथ थे।
इस घटना के बाद मुझे एक ही विचार आ रहे थे, अगर रवि डर जाता या फिर अपने प्रेम को भुला देता तो? क्या प्रेम कोई डरपोक व्यक्ति नहीं कर सकता?
जवाब था, प्रेम सभी कर सकते हैं। डरपोक भी और निडर भी। बस डरपोक व्यक्ति कभी प्रेमी नहीं बन सकता।
#प्रेम