मैंने अपने देश -प्रेम से
बहुत नहीं मांगा है
न सीमा का विस्तार
न विश्व पर विजय,
न भाषा पर विवाद
न लोगों में खटास।
मैंने उठते ही सोचता हूँ-
देश की आवाज सुनूं
शिक्षा का प्रसार देखूं
शान्ति का संचार पाऊँ
बिखराव को भूल जाऊँ
एक शक्तिशाली उड़ान भर
भारत को छू लूँ।
**महेश रौतेला
२०.0९.२०१५