एक और दिन आया निहायत ही बहुत खूबसूरत पलों का,
जज्बा मिला मिलन कर एक दूसरे को अपनी रूह से रूह जोड़ने का।
अनोखापन ,खूबी, बेचैनी, में जूज रहे दो शक्श नज़र मिलाने को,
बाहों में भर सुकून मिला हर हालात में वक़्त से नुमाइश का।
मेहरबानियाँ मिली खुदा ए इश्क के लम्हे में एक दूजे की प्यास बुझाने को,
चाहत हर लहू में दौड़ाया जैसे ना मिला जहाँ दिल्लगी के आलम का।
बादलों की घटाए गुम रही पूरे आकाश में जैसे दो पाक रूह नहलाने को,
लबो पे लब रख मिटा दिए जिंदगी के हर जुठ लिखावट के पन्नो का।
पसंदीदा दो जहन एक दूजे की जान बनकर जैसे मिले हर सातों जन्मों को,
अरमाँ थे जो वो बसा गए निगाहों के जरिए दिल में आशियाँ अरमानों का।
हो गई बहुत गंभीर समस्या एक बंध कमरे में जैसे सारी जिंदगी रोने को,
फिर भी गलती को गुनहगार ना माना इश्क़ में जैसे सच्चे आशिक़ी को।
में शुक्रगुज़ार हूँ ए-खुदा-मोहोब्बत में जैसे मिली एक सारी छुपी खुशियों की गहराई का,
बहुत नाराजगी, तकलीफ़, मजबूरी कहूं की क्या बहुत गबराई हुए थे एकदूजे से कुछ कहने को।
रों बैठा उसके परेशान चहेरे को देख उसे विश्वाश की एक चिंगारी दिलाने को,
अब क्या क्या कहूं में उसके बारे में बहुत इश्क़ ए जज्बा है मेरे जैसी जिंदगी का।
जो मिला इश्क़ को बढ़ावा दे हर दम एक नए अरमान को आगे बढ़ने का।
ए ख़ुदा एक इशारा दो इस अरमानों को पूरा करूँ, वरना तुम्हें ही ख़ौफ होगा बंदगी का।
DEAR ZINDAGI 💞🌹