क्या वजह होगी जो तेरे संग हूँ में?
तेरी सादगी मेरी आरज़ू क्यों है?
तेरे नसीब की कोई तो गुलछडी है,
जो मेरे सांसोमें समाई क्यों है?
तू मेरी धड़कन मेरी रूहमें है,
पागलों की तरह शामिल क्यों है?
आवाज बनके बयां होती है,
तेरी मंजिल मेरी महोबत क्यों है?
- सेतु