चाहा था आंखों से कभी ओझल न होने देंगे उन्हें
उनकी हर एक बात को दिल मे सजायेंगे
जिंदगी का हर एक पल उनके साथ बिताएँगे
पर क्या पता था इस कमबख्त दिल को
बेवफाई लिख दी उस जालिम ने इस जिंदगी में
कि अब ये आलम है कि उनकी यादो के मंज़र भी दिल से नही गुज़रते
पाबंधी ऐसी डाली है हमने अपने ही दिल पे की अब कोई यूँही नही ठहर सकता इस दिल में