जानवर रूपी इंसान
मानव भी मानवता भूल बन जाता है इतना बदतर
रख शराफत चेहरे पर बन जाता है कैसे जानवर
इज्जत का कोई मोल नहीं कर देते ऐसा व्यवहार
भूल जाते हैं रिश्ते नाते जब हो जाता लोभ सवार
किसी को अपना जाने ना किसी को अपना माने ना
करते जब करतूतें ऐसी तब किसी को पहचाने ना
घूम रहे हैं खुली सड़क पर करके अपनी काली नजर किसी की आबरू से खिलवाड़ के लिए ढूंढते अवसर
ना कोई इनका रोक है ना है इन पर कोई पाबंदी
ऐसा काम वही करते हैं जिनकी मति होती है गंदी
घर परिवार समाज देश से नहीं है इनका कोई नाता इनको तो को कुकर्मों को करने में बस आनंद है आता
भूल चुके हैं पाप पुण्य को जो इनको चुकाना है
होगा फैसला कर्मों का नहीं चलता कोई बहाना है
जी ले बंदे हंसी खुशी से सत्य मार्ग का करके चुनाव
मिट्टी के जीवन पर इतना क्यों दिखाए फिरता है भाव
जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳
vp army ⚔️🇮🇳