ना इस कदर यूं फिक्र करो मेरी डर लगता है मुझे इन इज्जतों से दास्तान ए इश्क मिट चुकी है मेरे मेहबूब के जहन से मेरी दिल बहलाता हूं आजकल नफरतों से।
ना इस कदर यूं फिक्र करो मेरी डर लगता है मुझे इन इज़्ज़तों से।
पहले पास आकर कहते थे कि हमें मोहब्बत है तुमसे सनम ना छोड़कर जाएंगे तुम्हें है खुदा की कसम फिर भी तन्हा छोड़ जाते हैं दिल तोड़ जाते हैं कुछ कातिल नजाकतों से।
ना इस कदर यूं फिक्र करो मेरी डर लगता है मुझे इन इज़्ज़तों से।
बाज़ार ए मोहब्बत मुकम्मल है आज पूरी तरह से
रोज बिकती है मोहब्बतें वहां इमानदारी और शराफतों से।
इस कदर यूं फिक्र करो मेरी डर लगता है मुझे इन इज़्ज़तों से।
जब भी मांगी हमने मोहब्बत खुदा से जिंदगी और हम हो रहे थे जुदा-जुदा से
गुजारिश करता हूं ना कहना कि किसी से कि हमें मोहब्बत है तुमसे सनम वरना खुदा भी महरूम हो जाएगा अपने बंदों की इबादतों से।
इस कदर यूं फिक्र करो मेरी डर लगता है मुझे इन इज़्ज़तों से।