हमारा मिलन था निश्चित , अनिश्चित राह फिर क्यों है
जोड़ियां बनाता यदि वो , ये दिल गुमराह फिर क्यों है
नहीं मझधार में वह छोड़ सकता , मिलाकर हमको
हुई कुछ भूल हमसे है , नहीं समझे हैं जीवन को
नहीं उंगली पकड़कर चलेगा , वह उम्र भर अपनी
करें पुरुषार्थ जीवन में , लिखी है ज़िन्दगी जितनी
हम आए हैं जिस मकसद से , उसकी इस धरा पर सब
निभाएं फ़र्ज़ अपना हम सभी , जितना दिया है रब
ज़रा समझें इशारा रब का हम , जिसने मिलाया है
फैलाएं प्रेम रस जग में , जो उसने हमें पिलाया है
मनाएं शुक्र रब का हम , उसे महसूस करें हर पल
बहार आएगी जीवन में , बेशक आज नहीं तो कल
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#अनिर्धारित