एक देश है एक है झंडा क्यूं सोच न एक समान
देश से है अस्तित्व हमारा अलग - अलग क्यों मान
इतने वर्ष गुलामी सहकर भी नहीं हुआ है भान
दूषित सोच से कब निकलेंगे अब तो गलती मान
सबसे पहले देश हो अपना देश के नाम हो जान
राष्ट्रगीत का मान करें हम कभी न हो अपमान
जाति धर्म हों विलग भले ही लक्ष्य हो एक समान
राष्ट्र प्रगति में बनें जो रोड़ा हो उसका काम तमाम
फर्क पड़े जन - जन को जब देश विरुद्ध हो काम
हस्ती मिट जाए एक पल में जितना बड़ा हो नाम
एक सोच रखना ही होगा हो चाहे जो मज़बूरी
सम्मान देश का रहे सलामत है ये बहुत ज़रूरी
हम रहें ना रहें कोई गम नहीं अमर ये देश रहेगा
जब तक गंगा - जमुना का ये अविरल नीर बहेगा
____________
#एकसमान