कोई फ़रियाद तो करे
फैला है अंधेरा दिल में, कोई उजाला तो करे
जाता नहीं किसी का खयाल कोई याद तो करे
ख्वाहिश बस इतनी, किसी के जुस्तजू में शाम गुज़रे
गर हो किसी का इरादा, कोई इशारा तो करे
जिंदगी की तन्हाइयों मे अकेले खामोश बैठे हैं
चाहत बस इतनी कोई हमें आवाज़ तो करे
लौट आऊँगा, उस जंहा से भी निराला
मसला इतना है कि कोई फ़रियाद तो करे