विश्वास
जाना तो पड़ेगा मुझको
पर मैं खुद को यहीं छोड़ जाऊंगा
तुम्हारे पास
नहीं ले जाऊंगा अपने को
अपने साथ।
तुम जब चाहे बातें
कर लेना मुझसे
जब चाहे महसूस कर लेना मुझे।
मुस्करा लेना अपने को
आईने में देखकर।
देखना मैं मिलूंगा तुम्हें
उस आईने की आँखों में।
और जब तुम्हें "विश्वास" हो
जाय कि मैं तुम्हारे पास हूँ
तो बता देना मुझे
कि मैंने सच कहा था।
क्योंकि मुझे मजबूरी में
जाना पड़ा था।
स्वरचित
जमीला खातून